जाणता राजादिव्य प्रेम सेवा मिशन
एक भव्य ऐतिहासिक महानाट्य

JANATA RAJAछत्रपति शिवाजी महाराज

छत्रपति शिवाजी महाराज का शौर्य, दृष्टि और शासन — एक विशाल मंच पर साकार। प्रस्तुति: दिव्य प्रेम सेवा मिशन।

दिन
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सेकंड
प्रवेशिका प्राप्त करेंबुकिंग शीघ्र ही प्रारंभ होगी
तिथि22 – 28 अक्टूबर 2026
स्थानसनसिटी, गाज़ियाबाद
बैठकप्रतिदिन 5,000
अवधि7 भव्य संध्याएं
महानाट्य

स्वराज की जीवंत गाथा

Janata Raja stage

जहां इतिहास फिर से सांस लेता है

जाणता राजा छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन को एक अभूतपूर्व भव्यता के साथ पुनर्जीवित करता है — सैकड़ों कलाकार, सजे हुए हाथी-घोड़े, विशाल दुर्ग, और हिंदवी स्वराज की स्थापना करने वाले युग की आत्मा।

यह केवल एक नाटक नहीं, बल्कि संस्कृति, साहस और चरित्र का अर्पण है — एक ऐसी कथा जिसने पूरे देश के दर्शकों को प्रेरित किया है, और अब गाज़ियाबाद आ रही है।

मुख्य आकर्षण

सैकड़ों कलाकारों का दल

विशाल खुले मंच पर सैकड़ों कलाकार उस युग को जीवंत करते हैं।

हाथी, घोड़े एवं शाही जुलूस

सजे हुए हाथियों और घोड़ों के साथ भव्य राजसी जुलूस।

विशाल दुर्ग एवं भव्य मंच

मराठा युग के दुर्ग और दरबार को साकार करते विराट सेट।

संगीत, वेशभूषा एवं भव्यता

जीवंत संगीत, पारंपरिक वेशभूषा और अद्भुत मंच-कला।

जीवन परिचय

छत्रपति शिवाजी महाराज

हिन्दवी स्वराज्य के प्रणेता का जीवन — वह योद्धा-राजा जिन्हें प्रजा ने "जाणता राजा" कहा।

Chhatrapati Shivaji Maharaj (from the Janata Raja Mahanatya)
छत्रपति शिवाजी महाराज

हिन्दवी स्वराज्य के प्रणेता

छत्रपति शिवाजी महाराज एक महान योद्धा और राजा थे, और 17वीं सदी में पश्चिमी भारत में मराठा साम्राज्य के संस्थापक थे। उनका जन्म 1630 में शिवनेरी के किले में हुआ, जो वर्तमान महाराष्ट्र में है। उनके पिता का नाम शाहजी भोंसले और माता का नाम जीजाबाई था।

मान्यता है कि जीजाबाई ने भगवान शिव से प्रार्थना कर उनके जैसा पुत्र मांगा था, जिस कारण उनका नाम भगवान शिव के नाम पर शिवाजी रखा गया। बालपन में माता जीजाबाई उन्हें महाभारत, रामायण और गौरवशाली गाथाएं सुनाया करती थीं — और उन्होंने इन महाकाव्यों की आदर्श शिक्षाओं को अपने जीवन में आत्मसात किया।

"जाणता राजा" — प्रजा का शासक

अपनी माँ जीजाबाई, समर्थ गुरु रामदास और भारत के अन्य संतों एवं समाज के उत्थान के आदर्शों से प्रेरित होकर शिवाजी महाराज ने न केवल हिंदुओं की सुप्त चेतना को जागृत किया, बल्कि उन्हें संगठित करते हुए मुगल शक्ति को खुली चुनौती दी। उन्होंने बचपन से यही सीखा कि जाति या धर्म से ऊपर सभी मनुष्यों को भगवान ने एक समान बनाया है और उनके बीच किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए।

उन्होंने हिंदुओं की एकता को प्रोत्साहन देकर "सनातन धर्म" का प्रचार किया — एक ऐसा धर्म जो जातिगत भेदभाव से ऊपर उठकर महिलाओं की प्रतिष्ठा व अधिकार, तथा कर्मकांडों पर भक्तिभाव को प्राथमिकता देता है।

सामाजिक न्याय और समानता उनके प्रशासन की आधारशिला थी। एक महान "हिंदवी साम्राज्य" की स्थापना करते हुए, विभाजनकारी और दमनकारी इस्लामी शासन का प्रतिरोध कर उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर हिंदू धर्म का पुनरुत्थान और प्रसार सुनिश्चित किया। विद्वानों, कलाकारों और कवियों को संरक्षण प्रदान किया गया। यही कारण था कि उन्हें "जाणता राजा" कहा जाने लगा — जिसका अर्थ है "प्रजा का शासक"।

शिवाजी ने एक ऐसे हिंदवी साम्राज्य की स्थापना की जिसमें प्रजाजनों का हित-संरक्षण सर्वोपरि था। उन्होंने औरंगज़ेब के जबरन धर्मांतरण और इस्लामीकरण का सबल विरोध करते हुए गैर-मुस्लिमों के धर्म और संस्कृति का संरक्षण किया। हिंदू राष्ट्रवाद के समर्थक और हिंदू हितों के संरक्षक के रूप में उन्होंने हिंदू अस्मिता की प्रतिस्थापना, सनातन संस्कृति के पुनरुद्धार, तथा मंदिरों के संरक्षण व निर्माण पर सर्वाधिक बल दिया। इसीलिए वे हिंदू राष्ट्रवादी आंदोलनों, विचारधाराओं और व्यक्तियों के प्रेरणा-स्रोत हैं।

सैन्य एवं रणनीतिक उपलब्धियाँ

शिवाजी की सैन्य सफलताएँ समकालीन सेनानायकों के लिए भी विस्मयकारी थीं। उन्होंने 1646 में आदिल शाही को चुनौती देते हुए तोरण किले पर अधिकार कर लिया — इस साहसिक विजय ने मुगल साम्राज्य और आदिल शाही जैसी दुर्जेय शक्तियों को स्तब्ध कर दिया। आगे चलकर उन्होंने रायगढ़ को अपनी राजधानी बनाया, और पुरंदर के युद्ध में फतेहख़ान के नेतृत्व वाली विशाल सेना को बुरी तरह पराजित किया।

महाराष्ट्र के विभिन्न स्थानों और समुद्र-तट पर उन्होंने अनेक किलों का निर्माण कराया, जिन्होंने हिन्दवी साम्राज्य की रक्षा-पंक्ति को सुदृढ़ किया। समुद्री शक्ति के महत्व को समझते हुए उन्होंने एक सशक्त नौसेना और सिंधुदुर्ग जैसे जलदुर्ग खड़े किए, और हिंद महासागर के व्यापार मार्गों में यूरोपीय शक्तियों के प्रभुत्व को चुनौती दी। गुरिल्ला युद्ध के वे माहिर थे — तीव्र और अचानक आक्रमण उनकी रणनीति की पहचान थे।

अष्टप्रधान मंडल

शिवाजी की विशेषता एक सुपरिभाषित प्रशासनिक संरचना थी, जो प्रभावी शासन सुनिश्चित करती थी। उनकी मंत्रिपरिषद् "अष्टप्रधान मंडल" कहलाती थी — आठ मंत्रियों की एक परिषद् जो राजा को राज्य के प्रशासन हेतु सही परामर्श देती और अपने-अपने विभाग के कार्यों का निष्पादन करती थी।

सुधार, जनकल्याण एवं संस्कृति

शिवाजी ने विकेन्द्रित शासन और स्थानीय सशक्तिकरण पर केंद्रित अनेक प्रशासनिक सुधार किए। उन्होंने बाज़ार स्थापित कर व्यापार और वाणिज्य को बढ़ावा दिया, सड़कों, पुलों और जल-प्रबंधन प्रणालियों का निर्माण कराया, और सिंचाई व जल-संरक्षण के नवीन उपाय अपनाए जिनसे कृषि को बल मिला और सूखे के समय सहायता हुई।

उन्होंने मातृभाषा, संस्कृत एवं भारतीय संस्कृति के विकास को प्रोत्साहित किया तथा विद्वानों और कवियों का संरक्षण किया। शिवाजी ने महिला सशक्तिकरण पर भी बल दिया और उच्च शिक्षा एवं कौशल के अवसर प्रदान कर महिलाओं को प्रशासनिक तथा सामाजिक भूमिकाओं में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया।

माँ जीजाबाई का योगदान

शिवाजी महाराज के जीवन-मूल्यों और मौलिक सिद्धांतों में उनकी माँ जीजाबाई का बहुत बड़ा योगदान था। उन्होंने शिवाजी को एक विद्वान, साहसी और दानशील नेता बनाया, जिनका योगदान आज भी भारतीय इतिहास में स्मरण किया जाता है। उनका युद्ध-कौशल और नीति-निपुणता उन्हें एक अद्वितीय और सशक्त योद्धा बनाती है।

अष्टप्रधान मंडल

शिवाजी की प्रसिद्ध आठ मंत्रियों की परिषद् — उनके न्यायपूर्ण और सक्षम शासन की आधारशिला।

01

पेशवा (प्रधानमंत्री)

अष्टप्रधान के प्रमुख सदस्य; राज्य के समस्त कार्यों का निरीक्षण और राजा की अनुपस्थिति में उसका प्रतिनिधित्व करते थे।

02

अमात्य (वित्त मंत्री)

सार्वजनिक आय-व्यय सम्बन्धी लेखों की जाँच कर उन्हें राजा के समक्ष प्रस्तुत करते थे।

03

वाकयानवीस (अभिलेख मंत्री)

राजा के कार्यकलापों और दरबार की घटनाओं का दैनिक अभिलेख तैयार करते थे।

04

शुरूनवीस (सचिव)

राजकीय पत्रों की भाषा और शैली की जाँच करते थे।

05

सर-ए-नौबत (सेनापति)

सेना की भर्ती, संगठन और अनुशासन का दायित्व सेनापति का था।

06

पंडितराव (दानाध्यक्ष)

धार्मिक विषयों को सुलझाना, विद्वानों का सत्कार, दान देना और अनुष्ठान कराना इनके कार्य थे।

07

सुमंत (विदेश सचिव)

विदेश सम्बन्धी मामलों तथा युद्ध व शान्ति के विषयों पर राजा को परामर्श देते थे।

08

न्यायाधीश

फौजदारी और दीवानी मुकदमों की सुनवाई करते और राज्य में न्याय व कानून-व्यवस्था के लिए उत्तरदायी थे।

शुभकामना संदेश

शुभकामनाएं एवं आशीर्वाद

जाणता राजा महानाट्य को संत-महात्माओं, गणमान्य व्यक्तियों एवं विशिष्ट अतिथियों के संदेश।

छत्रपति शिवाजी महाराज सिर्फ एक नाम नहीं है, हमारे लिए आराध्य देव हैं। उनका व्यक्तित्व अद्भुत था। उन्होंने स्वराज की भी स्थापना की और सुराज को भी साकार किया। वे अपने शौर्य और सुशासन के लिए भी जाने जाते हैं। छत्रपति शिवाजी महाराज ने जन कल्याण को सदैव सर्वोपरि रखा और उनकी सुरक्षा के लिए स्वयं को समर्पित कर दिया। इसलिए उनका जीवन आज भी भारतवर्ष के लिए पथ-प्रदर्शक बना हुआ है।
Shri Narendra Modi
श्री नरेन्द्र मोदी जी
माननीय प्रधानमंत्री
छत्रपति शिवाजी महाराज केवल एक राजा नहीं, बल्कि एक विचार और एक संस्कार हैं। छत्रपति शिवाजी महाराज ने उस कालखंड में धर्म और संस्कृति का संरक्षण किया जब वे संकट में थे। उनका जीवन हमें सिखाता है कि अपनी जड़ों और अपनी विरासत पर गर्व करना ही किसी भी राष्ट्र की असली शक्ति है। उनके लिए धर्म का अर्थ संकुचित नहीं, बल्कि कर्तव्य और मानवता का सम्मान था।
Shri Ram Nath Kovind
श्री राम नाथ कोविंद जी
माननीय पूर्व राष्ट्रपति
छत्रपति शिवाजी महाराज आधुनिक भारत के सर्वोच्च आदर्श हैं। आज के युग में छत्रपति शिवाजी महाराज प्रेरणा के जीवंत स्रोत हैं। उन्होंने विदेशी आक्रमणकारियों और मुगलों के विरुद्ध संघर्ष कर भारत में लगातार चली आ रही पराजय की मानसिकता को तोड़ा और स्वाभिमान का नवजागरण किया। शिवाजी महाराज का "स्वराज" ही वास्तविक अर्थों में "हिंदू राष्ट्र" की परिकल्पना है — एक ऐसा राष्ट्र जो धर्म, न्याय, और लोककल्याण के सिद्धांतों पर आधारित हो।
Dr. Mohan Bhagwat
डॉ. मोहन भागवत जी
पूज्य सरसंघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
छत्रपति शिवाजी महाराज ने समाज में कई आदर्श स्थापित किए। एक तरफ उन्होंने सनातन संस्कृति के रक्षक के रूप में कार्य किया, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने विलक्षण समाज को हिंदवी स्वराज के रूप में संगठित कर उसे एक नई दिशा भी देने का कार्य किया है। वे हमारी संस्कृति के प्रतिनिधि भी थे और पथ प्रदर्शक भी थे।
Shri Rajnath Singh
श्री राजनाथ सिंह जी
माननीय रक्षा मंत्री
मुझे यह जानकर अति प्रसन्नता हो रही है कि "दिव्य प्रेम सेवा मिशन" द्वारा हिंदवी स्वराज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन पर आधारित "जाणता राजा" महानाट्य का आयोजन "आगरा" में हो रहा है। मुझे आशा है कि यह महानाट्य सनातनी हिंदुओं और आने वाली भावी युवा पीढ़ी में चरित्र निर्माण के प्रति नवीन दृष्टिकोण का मार्गदर्शन करेगा। मैं "जाणता राजा" महानाट्य के सफल आयोजन हेतु शुभ मंगलकामनाएं प्रेषित करता हूँ।
Pujya Yogi Adityanath
पूज्य योगी आदित्यनाथ जी
माननीय मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश
यह असीम प्रसन्नता है कि दिव्य प्रेम सेवा मिशन विगत 30 वर्षों से समाज से वंचित लोगों के लिए नित्य नवीन कार्य कर रहा है और अब हिंदवी स्वराज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन चरित्र को चरितार्थ करते हुए आगरा की पावन धरा में समाज को सभी को संस्कारित कर रहा है। हम सभी को अपने पूर्वजों के त्याग, बलिदान, धैर्य और उनके जीवन चरित्र से प्रेरणा लेनी चाहिए और इस देश को "अखंड राष्ट्र" बनाना चाहिए। इसी आशा और विश्वास के साथ मैं आप सभी को अपना आशीर्वाद प्रदान करता हूँ।
Jagadguru Shankaracharya Swami Vasudevanand Saraswati Ji Maharaj
जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानन्द सरस्वती जी महाराज
ज्योतिषपीठाधीश्वर, बद्रीनाथ धाम, हिमालय
दिव्य प्रेम सेवा मिशन के प्रयास से दो लक्ष्य पूर्ण हो रहे हैं — पहला यह कि ऐसे राष्ट्रभक्ति के कार्यक्रम जिससे हमें शिक्षा, संस्कार और अपने इतिहास को जानने व समझने का सीधा दृश्यावलोकन हो सकेगा। दूसरा यह कि सेवा मिशन के "सेवा" कार्यों से समाज के प्रत्येक जन को परिचित करा कर अपने सेवा कार्यों में गति प्रदान करने का सतत प्रयास है। मैं दिव्य प्रेम सेवा मिशन के सभी कार्यकर्ताओं को इसके लिए शुभकामनाएं देता हूँ।
Shri Shiv Pratap Shukla
श्री शिव प्रताप शुक्ल जी
महामहिम राज्यपाल, हिमाचल प्रदेश
मुझे प्रसन्नता है कि "दिव्य प्रेम सेवा मिशन" आगरा में छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन को "जाणता राजा" महानाट्य के माध्यम से चरितार्थ कर रहा है और मुझे पूर्ण विश्वास है कि ऐसे राष्ट्रभक्ति के कार्यक्रम द्वारा समाज को शिक्षा, संस्कार और अपने इतिहास को जानने व समझने का सीधा अवसर प्राप्त हो सकेगा। मैं दिव्य प्रेम सेवा मिशन को "जाणता राजा" महानाट्य के सफल आयोजन हेतु अपनी शुभकामनाएं प्रदान करता हूँ।
Shri Brijesh Pathak
श्री बृजेश पाठक जी
माननीय उप मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश
जैसे श्री कृष्ण का जीवन धर्म की स्थापना के लिए हुआ था और राम का अवतरण रावण का वध करने के लिए हुआ था, उसी तरह छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन का लक्ष्य इस देश को हिंदू साम्राज्य बनाने का था। छत्रपति शिवाजी महाराज एक निष्पक्ष शासक थे और ऐसे शासक लोगों का भरोसा जीतते हैं।
Shri Suresh (Bhaiyaji) Joshi
श्री सुरेश भैया जी जोशी
पूर्व सरकार्यवाह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
कार्यक्रम

कार्यक्रम समय-सारणी

सनसिटी, गाज़ियाबाद में सात भव्य संध्याएं।

1
22 अक्टूबर 2026
दिन 1 · गुरुवार
2
23 अक्टूबर 2026
दिन 2 · शुक्रवार
3
24 अक्टूबर 2026
दिन 3 · शनिवार
4
25 अक्टूबर 2026
दिन 4 · रविवार
5
26 अक्टूबर 2026
दिन 5 · सोमवार
6
27 अक्टूबर 2026
दिन 6 · मंगलवार
7
28 अक्टूबर 2026
दिन 7 · बुधवार
प्रत्येक संध्या 5,000 सीटें
प्रवेशिका शुल्क — ₹1,100
मंचन का समय शीघ्र ही घोषित किया जाएगा।
प्रवेशिका प्राप्त करेंबुकिंग शीघ्र ही प्रारंभ होगी
सेवा ही साधना

दिव्य प्रेम सेवा मिशन

तीन दशकों से अधिक समय से, दिव्य प्रेम सेवा मिशन स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक समरसता एवं आपदा राहत के माध्यम से वंचितों की सेवा करता आ रहा है — यही जाणता राजा की प्रेरणा है।

स्वास्थ्य सेवा

वंचितों एवं आपदा-पीड़ितों की देखभाल और उपचार।

शिक्षा एवं संस्कार

बच्चों और युवाओं के लिए शिक्षा और संस्कार।

सामाजिक समरसता

समाज में एकता और गरिमा का निर्माण।

आपदा राहत एवं जनसेवा

आपदा और आवश्यकता के समय सेवा।

Divya Prem Sewa Mission
Divya Prem Sewa Mission
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समाचार एवं मीडिया

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दिव्य प्रेम सेवा मिशन एवं जाणता राजा महानाट्य का प्रेस कवरेज।

Press coverage 1Press coverage 2Press coverage 3Press coverage 4Press coverage 5Press coverage 6Press coverage 7Press coverage 8
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स्वयंसेवक एवं शुभचिंतक दिव्य प्रेम सेवा मिशन के हर कार्य की आत्मा हैं। जाणता राजा के लिए स्वयंसेवक पंजीकरण शीघ्र ही प्रारंभ होगा।

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स्थान
सनसिटी, गाज़ियाबाद22 – 28 अक्टूबर 2026
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